"Be with Me, and you will know the peace that Heaven brings. Stay with Me, and you will know it forever, for Heaven is a name for the truth of life."
"I, Oneness, talk as though I am Another. But would you have Me be quiet? Would you silence Me. Would you have Me listen only to your individuated thoughts?
"Or would you listen to your Wholeness which is what you hear when I speak?
"Let it be Our game. Let Us play Our roles. Yes, it is all I anyway, and if you could grasp, it is all you all the same.
"But meanwhile We engage in conversation. We roll over Our thoughts.
"The time will come when you are fully aware of Our Oneness, and even then We will play."
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The first thing that struck me when I started reading Heavenletters is how Heavenletters express magnificently the unique IDEA/VIBRATION on which God created each one of us. Heavenletters shine very High. They unconditionally serve the Universe. God has and is His own Theory of Universe, and Heavenletters are a source of Inspiration for the real foundations of Science, the Science of Light, Love and Creation. It inspires me to write something about the way Heavenletters cobble the road to science, when science discovers that it also has a heart.
In You Heart where God dwells in Hindi
Dear ones thank you so much for this opportunity :)
आपकी हृदय जहाँ ईश्वर बसते हैं
हेवनलेटर #३३४१ प्रकाशित : जनवरी १७, २०१०
ईश्वर बोले :
दो सफर हैं | एक जो दुनियाँ का है जिसमे तुम अपने आपको जानने की कोशिश करते हो तथा अपने व्यक्तित्व का बिकाश चाहते हो | इस सफर के साथ तुम्हारी आत्मा की सफर भी मिली हुई है | तुम्हारी आत्मा सुख-दुखः मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहती है; जैसे की मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ और कभिभी तुम्हारे बगैर नहीँ हूँ | तुम्हारी आत्मा मैं तुमसे ज़्यादा विवेक है | तुम यह जानते हो | आधी समय तुमको यह भी ज्ञान नहीँ होता की तुम क्या कर रहे हो, तथापि तुम्हारी आत्मा उसकी रोमांच-पूर्ण यात्रा मैं खुस रहती है | तुम्हारी आत्मा विश्वास-योग्य है | तुम अपनी आत्मा को खो सकते हो एसी कथा-कहानी मैं कदापि विश्वास मत करना ! क्या तुम मुझे खो सकते हो !
तुम्हारी व्यक्तित्व तुम्हारी आत्मा को छोड्ने की कोशिश कर सकती है, पर कभी सफल नहीँ हो सकती |
यह सब कथा के उपरान्त, अभी चलो तुम्हारे व्यक्तिगत जीवन के बारे मैं बात करें | केवल तुम्हे एसा लगता है की पृथ्वी मैं यह तुम्हारी अपनी निजी जिन्दगी है | वास्तव मैं यह एक सामूहिक यात्रा है | सभी एक ही नाव के सवारी हैं; पुराने दिनों की चप्पुओँ की तरह सभी एक दूसरे से संयुक्त तथा एक दूसरे के सहायक हैं | तुम्हारे हृदय तुम्हे जोड़ते हैं | एसा एक भी हृदय नहीँ है जो तुम्हारे साथ जुड़ा नहीँ है | एसा एक भी हृदय नहीँ है जिससे तुम नहीँ जुड़े हो | किसीसे तुम प्यार करते हो अथवा नहीँ करते हो लेकिन सबके साथ एक ही रिस्ता है | मेरे परमप्रिय जन; तुम लोग क़ैद नहीँ हो तथापि जुड़े हुए हो |
पृथ्वी मैं तुम्हारी यात्रा ज़्यादातर एक कल्पना ही है | कभी कभी ही सर उठाके तुम सत्य का दर्शन करते हो | ज़्यादातर एक नाटक मैं तुम अपनी भूमिका निभाते रहते हो | तुम एक कहानी मैं फंस जाते हो और अपने आपको उत्तेजित पाते हो | यहीं पे डर तुम्हे जकड लेता है | डर उसका पञ्जा तुमपे कस लेता है और सच जैसा ही लगने लगता है | डर सच से भी अधिक सच लगने लगता है |
मैं कहना चाहता हूँ की जब तुम खुस रहते हो तब सत्य मैं रहते हो, लेकिन तुम्हारे लिए जो ख़ुसी की परिभषा है वह मेरे से अलग हो सकती है | जब कोई चेक डाक मैं आती है तो अवश्य तुम खुश होते हो | जिस ख़ुसी की मैं बात कर रहा हूँ, वह एक भूमिगत झरने की तरह है जिसकी मंद-मंद ध्वनी तुम सुनते हो | यह मंद-ध्वनी यथार्थ मैं एक उन्माद नहीं है | यह सत्य की ध्वनी है जो तुममे बहती है | जैसे तुम कभी कभी दुनियाँ के रंगों से परिचित होते हो उसी तरह वास्तबिक जीवन के रंगों से भी परिचित होते हो |
बाहर वर्षा है, और तुम भीग जाते हो | जब तुम्हारा सामना अंतर के सत्य से होता है; जब तुम्हे उस सत्य के स्रोत का जो सबके नीचे स्थित है उसका जरासा भी ज्ञान होता है तब शान्ति मिलती है, आनन्द मिलता है, तथापि यह एक बहत शांत अनुभव है | यह केवल एक मंद-ध्वनी है, तथापि यह मंद-ध्वनी यथेष्ट है | यह मंद-ध्वनी इतनी सूक्ष्म है की तुम इससे करीब-करीब भटक सकते हो | यह निरन्तर वहीँ पे होती है, लेकिन काफी देर तक तुमसे नज़र बचाकर रहती है | तुम्हारे अंतर मैं यह एक गुप्त उद्यान की तरह है, तथापि तुम इसमे कभिभि जा सकते हो | तुम इसमे अभी जा सकते हो | हम मेरे शव्दो को इसी स्रोत की मंद-ध्वनी कह सकते हैं | क्या तुम अभी सुन सकते हो ? क्या तुम मेरे हृदय के धड़कानों को तुम्हारी नाम लेते हुए सुन सकते हो | कभी कभी तुम मेरे पुकार को एक ताल की तरह सुन सकते हो जैसे की मैं एक प्रेम कि घंटा को बजा रहा हूँ | तुम्हे यह पास मैं या फिर दूर मैं सुनाई दे सकती है | तुम इसे सुन पाते हो या नहीँ सुन पाते हो, तथा कितनी उच्च स्वर या मंद स्वर मैं सुनते हो, मेरा हृदय तुम्हारे मैं धड़क रहा है और यह इसी प्रेम की आवाज़ है जिसे तुम अती क्षीण स्वर मैं ही सही लेकिन कभी कभी सुनते हो |
अच्छी तरह से कान दो, जिससे की तुम सुन सको | तुमने बहत बार मुझको सुनने के लिए कहा है | अब मैं तुम्हे सुनने के लिये कह रहा हूँ; मैं तुम्हे तुम्हारी हृदय मैं, जहाँ पे मेरा बास है, वहाँपे पुकार रहा हूँ |